सोमवार, 4 जुलाई 2011

गम मे भी मुस्कुराना सिखो

जीन्दगी मे अगर कुछ करना हो तो दर्द को छुपाना सिखो 
महफिल मे अगर हाथ मिलाना हो तो गम को छुपाना सिखो 
अगर दोस्त बनाना  है तो हाथ से हाथ मिलाना सिखो    
अगर दुस्मनी मिटानी है तो दुस्मन को गले लगाना सिखो 
दोस्तो को अगर खुश रखना है तो उन्हे अपने बारे मे सच् बताना सिखो 
अगर जीन्दगी अकेले बिताना है तो कमलेश के जैसा गम मे भी मुस्कुराना सिखो  

शनिवार, 2 जुलाई 2011

मुझे माफ करना जानेमन

सोचा था आज मिलूँगा तुमसे मगर मिल ना पाया
 आने से पहले किशी ने मुझे साजीस करके जाल मे फसाया  
जो नाम कभी सोचा भी नही था वो नाम आज पाया
मुझे माफ करना जानेमन तुम्हे बताने से पहले मुझे जेल मे पथाया    

कारागार

याद करने के सिवा कुछ कर नही सक्ता 
फोन करना चहता हु मगर कर नही पता
मै तो कारागार मे हु जानेमन
कब् मिलूँगा कुछ समझ मे नही आता

सोमवार, 20 जून 2011

जान तुम कहाँ हो

 जान  तुम  कहाँ  हो  आके  मेरे  हालत  तो  देखो 
तेरे  याद  मे  हर  पल  जिता  हु  हर  पल  मरता  हु
कुछ  तो  सोचो  अगर  सच्    मे  तुम  प्यार  करती  हो  तो
मेरे  ख्वाबो  मे  तुम  भी  कभी  दूब  के  देखो 
तुम  को  मै  हि  नजर  आऊंगा  झुठ  लगे  तो  आजमाके  देखो


कमलेश कुमार



शनिवार, 18 जून 2011

लटका है मेरी जान

एक तिर दो शिकार एक भगवान दो अवतारएक लड्की  दो यार  दो दिल एक प्यार 
दो शरीर  एक जान  एक जान दो सम्मान दो सम्मान एक महफिल एक महफिल 
धेर सारे इन्सान उसी के बीच मे मेरी जान जान के नजर मे है बहुत सारे मेहमान 
मगर कोइ नही जनता छत पे लटका है मेरी जान 




कमलेश कुमार

सिगरेट पिना गलत है या सहि

सिगरेट के डब्बे मे लीखा है कि सेहत के लिए खराबी है 
तो सिगरेट पे क्यु नही 
हम सिगरेट पिया करते है सिगरेट कि डब्बे तो नही 
अगर सब सिगरेट पिना छोड दे तो कितने लोग भुख के मारे मर जाएगा  
तो अब आप लोग बताउ यारो सिगरेट पिना गलत है या सहि 



कमलेश कुमार


मै जब भी याद करता हु उसे ये आँख भर आते है

मै जब भी याद करता हु उसे ये आँख भर आते है
दिल से निकाल्ने कि कोसिश करु तो दिल नाकाम हो होजता है 
था कभी मेरे ख्वाबो कि रानी वो 
मगर बदकिस्मत अब वो किशी औरो का सेज सजाती है 




कमलेश कुमार